गमले में आदमी जड़ें धरती से जोड़ने की इच्छा,आकाश छूने की इच्छा,बाहें फैलाने की इच्छाऔर हवा के साथ गाने की इच्छा,इस तरह से जन्म लेता हैएक पेड़, एक फूल और फल।यूँ तो धरती कम न थ... Read More →
वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान हैमाथे पे उस के चोट का गहरा निशान हैवो कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तुगूमैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान हैसामान कुछ नहीं है फट... Read More →
फूल काॅलर पे बस लगाना है फूल कॉलर पे बस लगाना है कितना आसान मुस्कुराना है झूलती है कमान पर चिड़िया और तरकश में आशियाना है पड़ गई है ज़बान उलझन में जो छुपाना है वो बताना है हम जहाँ हैं व... Read More →
माइक रहे माला रहे (अदम गोंडवी) तालिब-ए-शोहरत हैं कैसे भी मिले मिलती रहे आए दिन अख़बार में प्रतिभूति घोटाला रहे एक जनसेवक को दुनिया में अदम क्या चाहिए चार छै चमचे रहें माइक रहे माला रहे - अदम ग... Read More →
मरना आदमी मरने के बाद कुछ नहीं सोचता आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता कुछ नहीं सोचने और कुछ नहीं बोलने पर आदमी मर जाता है - उदय प्रकाश Read More →
कायनात बस चन्द करोड़ों सालों में सूरज की आग बुझेगी जब और राख उड़ेगी सूरज से जब कोई चाँद न डूबेगा और कोई जमीं न उभरेगी तब ठंढा बुझा इक कोयला सा टुकड़ा ये जमीं का घूमेगा... Read More →